श्री सांदीपनी आश्रम

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महर्षि सांदीपनी व्यास के इस आश्रम में भगवान् श्री कृष्ण, सुदामा तथा श्री बलराम ने गुरुकुल परंपरा के अनुसार विद्याध्ययन कर चौसठ कलाएं सीखीं थीं. उस समय तक्षशिला तथा नालंदा की तरह अवन्ती भी ज्ञान विज्ञान और संस्कृति का केंद्र थी. भगवान् श्री कृष्ण यहाँ स्लेट पर लिखे अंक धो कर मिटाते थे इसीलिए इसे अंकपात भी कहा जाता है. श्री मद्भागवत, महाभारत तथा अन्य कई पुरानों में यहाँ का वर्णन है. यहाँ स्थित कुंड में भगवान् श्री कृष्ण ने गुरूजी को स्नानार्थ गोमती नदी का जल सुगम कराया था इसलिए यह सरोवर गोमती कुंड कहलाया. यहाँ मंदिर में श्री कृष्ण, बलराम और सुदामा की मूर्तियाँ हैं. महर्षि सांदीपनी के वंशज आज भी उज्जैन में हैं तथा देश के प्रख्यात ज्योतिर्विदों के रूप में जाने जाते हैं. उत्खनन में इस क्षेत्र से चार हज़ार वर्ष से ज्यादा पुराने पाषाण अवशेष मिले हैं.

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