दुर्गासप्तशती पाठ

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दुर्गाजी की महीमा

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्मताम्‌।

मां दुर्गा साक्षात् शक्ति का स्वरूप है। दुर्गा देवी सदैव देवलोक, पृथ्वीलोक एवं अपने भक्तों की रक्षा करती है। दुर्गाजी संपूर्ण संसार को शक्ति प्रदान करती है। जब कोई मनुष्य किसी संकट या विपरित परिस्थितियों में फंस जाता है एवं उनकी शरण ग्रहण करता है तो वे उसे संघर्ष करने की शक्ति प्रदान करती है एवं उसे समस्याओं से छूटकारा प्राप्त करने में मदद करती है। इनका पूजन-पाठ आदि बडी विधि-विधान एवं ध्यान से करना चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार की त्रृटि होने पर हानी होने की संभावना ज्यादा रहती है। देवी दुर्गा की उपासना करने वालों को भोग एवं मोक्ष दोनो प्राप्त हो जाते है एवं दुर्गाजी साधक की सभी कामनाओं की पूर्ति करती है। मां दुर्गा की कृपा से मनुष्य दुख, क्लेश, दरिद्रता आदि से मुक्त हो जाता है।

दुर्गासप्तशती पाठ करवाने से लाभ

  • दुर्गासप्तशती के पाठ करवाने से परिवार में सुख-शांति आदि का वातावरण निर्मित हो जाता है।
  • दुर्गासप्तशती के पाठ करवाने से आकस्मिक संकट या अनहोनी की स्थिति टल जाती है।
  • इसके पाठ से अदालती कार्यो में सफलता मिलती है।
  • इसके पाठ के प्रभाव से धनहानी, ऋण आदि की निवृत्ति होती है।
  • आर्थिक लाभ प्राप्ति के लिए भी दुर्गासप्तशती का पाठ किया जाता है।
  • जीवन में यदि शत्रुओं से भय एवं समस्याएं आ रही हो तो दुर्गासप्तशती के पाठ से उनसे रक्षा होती है।
  • किसी अधिकारी के पद जाने की संभावना हो तो दुर्गासप्तशती पाठ से उसकी रक्षा होती है।
  • किसी विशेष कार्य कि सिद्धि के लिए इसका पाठ करवाना चाहिए।
  • दुर्गासप्तशती का पाठ करवाने से समस्त प्रकार के रोगों, भयों, दुखों कष्टों आदि से छूटकारा प्राप्त होता है।
  • मां दुर्गा की प्रसन्नता के लिए दुर्गासप्तशती का पाठ करवाना चाहिए।

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