श्री अंगारेश्वर महादेव

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रक्तोम्बरो रक्त वपु: किरीटी,चतुर्भुज मेष गतो गदाभ्रत
धरासुत: शक्तिधरशच सूली सादा मम स्याद वरद: प्रशांत
श्री स्कांदे महापुराण एका शीतिसाहस्रया,पंचम आवंत्य खंडे अवंति क्षेत्र महात्म्ये
(अंगारक) महात्म्ये वर्णननाम स्पत्रिशोधयाय:
श्री अंगारेश्वर महादेव (उज्जैन) ही भूमि पुत्र मंगल हैं अवंतिका कि प्राचीन 84 महादेवों में स्थित 43वे महादेव श्री अंगारेश्वर महादेव जो कि सिद्ध्वट के सामने वट्व्रक्ष के सामने शिप्रा के उस पर स्थित हैं, जिन्हें मंगल देव (गृह) भी कहा जाता हैं| जो व्यक्ति प्रतिदिन इस महालिंग श्री अंगारेश्वर का दर्शन करेगा उनका फिर जन्म नही होगा| जो इस लिंग का पूजन मंगलवार को करेगा वह इस युग में कृतार्थ हो जाएगा, इसमे कोइ संशय नही हैं| जो मंगलवार कि चतुर्थि के दिन अंगारेश्वर का दर्शन-व्रत-पूजन करेंगे वह संतान, धन, भूमि, सम्पत्ति, यश को प्राप्त करेगा| इनके दर्शन-पूजन से वास्तुदोष, भुमिदोष का भी निवारण होता हैं| न्यायालय में विजय प्राप्त होती हैं| इस लिंग पर भात पूजन करने से मंगल दोष, भूमि दोष का भी निवारण होता

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